Tuesday, November 18, 2025

त्रादसी

मित्रों..

फिर मन बहुत दुखी हुआ ये जानकर कि हमारे देश के वीर सपूतों एवम् क्रांतिकारियों के परिवार के कितने ही बुजुर्गवार लाचार और असहाय होकर वृद्धाश्रम में रहने को विवश हैं।आज फिर हम सब शर्मशार हुए ।ये त्रासदी ही है हमारे देश की कि आज ऐसे विभूतियों के अपने ही लोग इस तरह की ज़िन्दगी जीने को विवश हैं।कल जिन महानुभावों के सम्मान से हम गर्वित हो रहे थे ।पुलकित हो उठा था रोम रोम हर्ष और उल्हास से।गुणगान करते वाणी नही थकती थी।
जानकर ये त्रासदी और ये समाचार  फिर ह्रदय व्यथित हुआ और झुक गया सिर शर्म से देख इन वाक्यात को।हम सब अभी भी जकड़े हुए हैं शायद गुलामी की जंज़ीरों में मानसिक तौर पे।हम दोष देतें हैं सिस्टम को तो सिर्फ सिस्टम या देश ही नहीं हम सब भी दोषी हैं।क्या हम सब देख कर भी आँख नही बंद कर लेतें है होते देख ये अत्याचार ये अनाचार और ये अनितियां।हम सब भी गुनहगार हैं जो अपने सपूतों और महान देश भक्तों के त्याग ,बलिदान और उनकी आहुतियों द्वारा मिली आज़ादी को गवां बैठेंगे।हमारी सच्ची श्रद्धांजलि या सम्मान उनके प्रति तब होगी जब हम स्वयं  जागरूक हों और लोगों को जागरूक करें।ये मान सम्मान और तमगे और श्रद्धांजलि सभाओं से कुछ हासिल नही होगा जबतक की हमारी सोच को हमने आज़ाद नही किया तो वो दिन दूर नही जब हम स्वयं भी इन बेड़ियों में जकड़े अंतिम साँसे ले रहे होंगे अँधेरी बदबूदार किसी काल कोठरी में।
सोच को बदलना होगा हम सबको और इसकी शुरुआत करनी होगी सर्वप्रथम अपने से और अपने घर से।तब जाकर बनेगा एक स्वस्थ और सुसंस्कृत खुशहाल समाज।
वंदे मातरम् और जय हिन्द का अलख जगाना होगा जन जन में।
साथियों हाथ बढ़ाओ मिलाओ कदम से कदम और जगाओ अलख।इति
          वंदे मातरम्
           जयहिंद
                          ।।मौली।।

Tuesday, June 2, 2015

मानवता

यूँ तो इंसान मात्र स्वार्थी होता है।हम बिना स्वार्थ के कुछ नही करते हाँ कुछ लोग कुछ भिन्न भी हैं जो निःश्वार्थ किसी के लिए कुछ करतें हैं परंतु उँगलियों पे गिने चुने ही।
हमे अगर यह पता चले किसी ज्योतिष या ज्ञानी जनों से कि पंछियों को दाना दो तो पुण्य होगा,उनके लिए पानी रक्खो तो भला होगा,कौवों को रोटी या मीठा दो तो पूर्वज प्रसन्न होंगे या काले कुत्ते की सेवा करो उसे शनि मंगल रोटी या मीठा खिलाओ तो ग्रह कटेंगे। बंदर को चना खिलाओ तो हनुमान जी खुश होंगे,चींटियों को आटा या चीनी डालो तो खुशहाली और समृद्धि आएगी, गाय को रोटी गुड़ खिलाओ तो  गुरु या विष्णु जी प्रसन्न आदि आदि कई टोटके और मशवरे।
                  परंतु मित्रों क्या आपने कभी सोचा कि इन सबके पीछे उद्देश्य क्या है?
सिर्फ और सिर्फ एक वो है मानवता। हममे जीवों के प्रति दया,प्रेम और कर्तव्य।
लेकिन हम मनुष्य तब तक कुछ नही करते जब तक कि उसमे हमारा स्वार्थ या लाभ निहित न हो।हममे  दया,माया,मोह,करुणा,प्रेम सिर्फ अपनो के लिए ही क्यों है?
क्यों नही हम किसी निसहाय चाहे वो मनुष्य हो या की जीव या पेड़ पौधे उन सभी की  सेवा निश्वार्थ भाव से अपना कर्तव्य समझ क्यों नही करते। जबकि हमसे बेहतर पशु पंछी है जो खाना या पानी पाकर भी तब तक ग्रहण नही करते जबतक कि अपने संगे साथियों को नही सम्मिलित करते चाहे वो कितने ही प्यासे या भूखे हों। एकता,सौहार्द और प्रेम हमे उनसे सीखना चाहिए। बिना किसी भेदभाव के सब मिलजुल कर रहतें और हमे एक सन्देश देतें।
वहीं हम इंसान अगर चिड़ियों के लिए पानी रक्खा तो उसे बिल्ली नही पी सकती गाय के लिए रक्खा पानी कोई और पशु नही पी सकता या हम पीने नही देते क्योंकि उससे देवता या ग्रह कुपित हो जायेंगे। जबकि सारे पशु एकसाथ एक ही जगह से पानी पी लेतें हैं बिना किसी भेदभाव के।
पेड़ पौधों से ईश्वर के लिए दूसरों के बगीचों से सुबह सुबह फूल चुराकर ईश्वर को प्रसन्न करतें हैं लेकिन कदाचित भूलकर भी पड़ोसी या उन बगियों में या सड़क किनारे के पेड़ पौधों को पानी नही डालेंगे न ही उन डालियों से नरमी से पेश आएंगे जो हमे छाया देती है शुद्ध वायु और फल फूल तथा औषधि देती है।
मित्रों आओ सब मिलकर इन कलुषित विचारों और भावनाओं से खुद को पृथक कर एक नव निर्माण करें अपने मन,आत्मा,सोच और मानसिकता का। मानवता का कुछ फ़र्ज़ तो निभायें क्यों न एक मिसाल बने आने वाली पीढ़ी के लिए।
बहुत लंबा लेख है ।
किसी को आहत करने का मेरा कोई उद्देश्य नही परंतु ये सत्य और प्रतिदिन घटित होने वाली दिनचर्या है।सादर.....
                                  मौली