मित्रों..
फिर मन बहुत दुखी हुआ ये जानकर कि हमारे देश के वीर सपूतों एवम् क्रांतिकारियों के परिवार के कितने ही बुजुर्गवार लाचार और असहाय होकर वृद्धाश्रम में रहने को विवश हैं।आज फिर हम सब शर्मशार हुए ।ये त्रासदी ही है हमारे देश की कि आज ऐसे विभूतियों के अपने ही लोग इस तरह की ज़िन्दगी जीने को विवश हैं।कल जिन महानुभावों के सम्मान से हम गर्वित हो रहे थे ।पुलकित हो उठा था रोम रोम हर्ष और उल्हास से।गुणगान करते वाणी नही थकती थी।
जानकर ये त्रासदी और ये समाचार फिर ह्रदय व्यथित हुआ और झुक गया सिर शर्म से देख इन वाक्यात को।हम सब अभी भी जकड़े हुए हैं शायद गुलामी की जंज़ीरों में मानसिक तौर पे।हम दोष देतें हैं सिस्टम को तो सिर्फ सिस्टम या देश ही नहीं हम सब भी दोषी हैं।क्या हम सब देख कर भी आँख नही बंद कर लेतें है होते देख ये अत्याचार ये अनाचार और ये अनितियां।हम सब भी गुनहगार हैं जो अपने सपूतों और महान देश भक्तों के त्याग ,बलिदान और उनकी आहुतियों द्वारा मिली आज़ादी को गवां बैठेंगे।हमारी सच्ची श्रद्धांजलि या सम्मान उनके प्रति तब होगी जब हम स्वयं जागरूक हों और लोगों को जागरूक करें।ये मान सम्मान और तमगे और श्रद्धांजलि सभाओं से कुछ हासिल नही होगा जबतक की हमारी सोच को हमने आज़ाद नही किया तो वो दिन दूर नही जब हम स्वयं भी इन बेड़ियों में जकड़े अंतिम साँसे ले रहे होंगे अँधेरी बदबूदार किसी काल कोठरी में।
सोच को बदलना होगा हम सबको और इसकी शुरुआत करनी होगी सर्वप्रथम अपने से और अपने घर से।तब जाकर बनेगा एक स्वस्थ और सुसंस्कृत खुशहाल समाज।
वंदे मातरम् और जय हिन्द का अलख जगाना होगा जन जन में।
साथियों हाथ बढ़ाओ मिलाओ कदम से कदम और जगाओ अलख।इति
वंदे मातरम्
जयहिंद
।।मौली।।
फिर मन बहुत दुखी हुआ ये जानकर कि हमारे देश के वीर सपूतों एवम् क्रांतिकारियों के परिवार के कितने ही बुजुर्गवार लाचार और असहाय होकर वृद्धाश्रम में रहने को विवश हैं।आज फिर हम सब शर्मशार हुए ।ये त्रासदी ही है हमारे देश की कि आज ऐसे विभूतियों के अपने ही लोग इस तरह की ज़िन्दगी जीने को विवश हैं।कल जिन महानुभावों के सम्मान से हम गर्वित हो रहे थे ।पुलकित हो उठा था रोम रोम हर्ष और उल्हास से।गुणगान करते वाणी नही थकती थी।
जानकर ये त्रासदी और ये समाचार फिर ह्रदय व्यथित हुआ और झुक गया सिर शर्म से देख इन वाक्यात को।हम सब अभी भी जकड़े हुए हैं शायद गुलामी की जंज़ीरों में मानसिक तौर पे।हम दोष देतें हैं सिस्टम को तो सिर्फ सिस्टम या देश ही नहीं हम सब भी दोषी हैं।क्या हम सब देख कर भी आँख नही बंद कर लेतें है होते देख ये अत्याचार ये अनाचार और ये अनितियां।हम सब भी गुनहगार हैं जो अपने सपूतों और महान देश भक्तों के त्याग ,बलिदान और उनकी आहुतियों द्वारा मिली आज़ादी को गवां बैठेंगे।हमारी सच्ची श्रद्धांजलि या सम्मान उनके प्रति तब होगी जब हम स्वयं जागरूक हों और लोगों को जागरूक करें।ये मान सम्मान और तमगे और श्रद्धांजलि सभाओं से कुछ हासिल नही होगा जबतक की हमारी सोच को हमने आज़ाद नही किया तो वो दिन दूर नही जब हम स्वयं भी इन बेड़ियों में जकड़े अंतिम साँसे ले रहे होंगे अँधेरी बदबूदार किसी काल कोठरी में।
सोच को बदलना होगा हम सबको और इसकी शुरुआत करनी होगी सर्वप्रथम अपने से और अपने घर से।तब जाकर बनेगा एक स्वस्थ और सुसंस्कृत खुशहाल समाज।
वंदे मातरम् और जय हिन्द का अलख जगाना होगा जन जन में।
साथियों हाथ बढ़ाओ मिलाओ कदम से कदम और जगाओ अलख।इति
वंदे मातरम्
जयहिंद
।।मौली।।